हेरिटेज ट्रेन


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रास्त्र मंडल खेलो के दौरान भारतीय रेल के स्वर्णिम इतिहास को प्रदर्शित करने के लिए भारतीय रेल की और से हावरा से दिल्ली जाने के लिए चली के लिए एक हेरिटेज ट्रेन मुगलसराय स्टेशन पर जब पहुची तो उसे देखने के लिए लोगो का हुजूम उमड़ पड़ा | स्टीम इंजन के सहारे चलने वाली इस ट्रेन में इष्ट इण्डिया कंपनी के समय की सवारी डिब्बे व भारत की पहली वातानुकूलित सवारी डिब्बा भी लगा था |
एशिया के सबसे विशालतम यार्ड और पूर्वोत्तर भारत ( रेलवे ) का मुख्य द्वार कहे जाने वाले मुगलसराय जक्शन पर शाम लगभग 7;30 बजे हावरा से चलकर न्यू डेल्ही जाने वाली एक हेरिटेज ट्रेन आकर रुकी | स्टीम इंजन से चलने वाली इस ट्रेन में कई अनोखे डिब्बे लगे हुए थे | ये सवारी डिब्बे काफी ठोस व मजबूत बनाये गए थे | जो आज भी अपनी मजबूती को बाया करते है | भारतीय रेल को एक अलग पहचान देते है | अक्तूबर में डेल्ही में होने वाली कॉमनवेल्थ गेम में भारतीय रेल की विरासत को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने के लिए इसे दुल्हन की तरह सजाकर दर्शको और विदेशी मेहमानों को देखने के लिए रख्खा जायेगा | इस ट्रेन में इष्ट इंडिया कंपनी के समय की निर्मित द्वितीय श्रेणी की सवारी डिब्बे भी लगाये गए है | इस ट्रेन में सबसे विशेष और आश्चर्य जंक बात यह है की | ट्रेन में 1967 में बनाये गए प्रथम वातानुकूलित बोगी भी शामिल किया गया है | आज की युवा पीडी के लिए अचंभित करने वाला और देखने योग्य है | वही इस ट्रेन में सन 1921 से लेकर 1967 तक की कई ऐसी बोगिया भी सामिल थी जो देखने में काफी ठोस व् मजबूत दिखाए पड़ रही थी | इस ट्रेन को देखने आये लोगो ने माना की आज तक पुराने ज़माने की फिल्मो में दिखाए जाने वाली इस तरह की स्टीम इंजन के सहारे चलने वाली ट्रेन को अपनी आँखों से देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे यह कोई स्वप्न के सामान हो | ट्रेन जैसे ही मुगलसराय जक्सन पर पहुची लोगो का हुजूम स्टीम इंजन के सहारे चलने वाले इस ट्रेन को देखने के लिए दौड़ पड़ा | किसी को विस्वाश ही नहीं हो रहा था की आज भी कोई ट्रेन स्टीम इंजन के सहारे चलाया जा रहा है | रास्त्र मंडल खेलो के दौरान दिल्ली में विदेशी मेहमानों को ये ट्रेन भारतीय रेल के सफल व स्वर्णिम इतिहास को दिखायेगी |

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