पंद्रह मिनट में रिटर्न दाखिल


भोपाल: घंटों लाइन में लगकर रिटर्न दाखिल करने से अब आयकर दाताओं को छुटकारा मिल गया है। आयकर विभाग द्वारा शुरू किए गए टोकन सिस्टम के कारण इस बार लोगों को आयकर विवरणी दाखिल करने में बमुश्किल पंद्रह मिनट का समय लग रहा है। आयकर रिटर्न दाखिल करने के अंतिम दिन से तीन दिन पूर्व अब तक लगभग 80 हजार लोगों ने आयकर रिटर्न दाखिल कर दिए हैं। ज्ञात हो कि आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है।
राजधानी में इस बार आयकर आयकर दाताओं की सुविधा के लिए आयकर विभाग ने टोकन सिस्टम लागू किया है। इस सिस्टम के कारण अब लोगों के आयकर फार्म बिना लाइन में लगे लिए जा रहे हैं। पिछले पांच साल से आयकर विवरणी दाखिल करते चले आ रहे इंजीनियर कालेज के प्रोफेसर वीरेन्द्र सिंह ने बताया कि इस बार की व्यवस्था के कारण करदाताओं को काफी सुविधा हुई है। पहली बार आयकर रिटर्न दाखिल करने आई डा. शीला राय ने बताया कि टोकन सिस्टम से उनका आयकर फार्म काफी सुगमता से जमा हो गया।
आयकर विभाग की इस व्यवस्था से जहां करदाता का समय बच रहा है, वहीं आयकर अधिकारियों को भी रिटर्न फार्म जमा करने में आसानी हो रही है। एक आयकर अधिकारी ने बताया कि पहले की व्यवस्था में लोग गलत वार्ड की लाइन में लग जाते थे, जिससे उन्हें दोबारा सही लाइन में लगना पड़ता था। इससे करदाता को ज्यादा समय लगता था। नई व्यवस्था में टोकन देते समय ही आयकरदाता का फार्म देखकर उसे उस वार्ड का टोकन दिया जा रहा है। जिससे गलत वार्ड में फार्म जमा होने की गलती भी नहीं हो रही है।
.. तो लग सकती है पांच हजार तक पेनाल्टी
आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित है। इस तिथि तक भी यदि कोई अपनी आयकर विवरणी नहीं दाखिल कर पाता है तो उसके लिए 31 मार्च तक का समय आयकर विभाग रिटर्न दाखिल करने के लिए देता है। पर इस अवधि का लाभ उन्हीं करदाताओं को मिलता है जो अपना आयकर जमा करा चुके हों। आयकर जमा नहीं करने और 31 मार्च तक आयकर विवरणी दाखिल नहीं करने पर आयकर अधिनियम की धारा 271 के तहत संबंधित पर अधिकतम पांच हजार रुपए तक की पेनाल्टी लगाई जा सकती है। इसके अलावा यदि 31 जुलाई तक करदाता टैक्स पूरा दे देता है तो उसे कोई नुकसान नहीं है, पर इस अवधि तक टैक्स जमा न करने वालों पर 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज लिए जाने का भी प्रावधान है।
पेन नंबर नहीं देने पर कट सकता है टीडीएस
आयकर विवरणी में अब पेन नंबर की जानकारी नहीं देने पर 20 प्रतिशत तक टीडीएस कट सकता है। आयकर अधिनियम में इस वर्ष से यह संशोधन किया गया है। आयकर विभाग करदाताओं को छूट देने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि टैक्स पूरा आए। एक निश्चित राशि से ऊपर के लेनदेन की सारी जानकारियां विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से विभाग को मिल जाती हैं। यहां तक कि अब तो विभाग को कई अन्य सूत्रों से भी कर चोरी की जानकारियां मिल रही हैं। पर विभाग के पास मेन पावर की कमी होने के कारण आयकर विभाग सारी सूचनाओं पर कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। हालांकि सभी सूचनाओं का संग्रह कर उनकी पड़ताल करने का काम आयकर विभाग कर ही रहा है

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