तीन अपहरण/खुलाशा


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ये कहानी कोई फिल्म की कहानी से कम नही, घुमने की चाह ने बेटें, बहू और बेटी को इतना अंधा बना दिया की इन्हे अपेन मां बाप और बहन की जरा सी भी परवाह नही हुई। और तीनों बीना बताये ही रात के अंधेरे में चल पड़े घमने रात का अंधेरा इसलिए की कही दिन के उजाले में कोई देख लेता तो शायद इन्हें जाने नही देता।

गोरखपुर के पिपिगंज निवासी रफीउल्लाह के बेटें चिन्टु(24), बहू काबुन निशा(22) व बेटी रिंकी बहू काबुन निशा गर्भवती है। और किसी वहज से रात में वो बेटी रिंकी को जगाई लेकिन रात के वक्त होेने से रिंकी ने अपने भाई चिन्टु को भी जगा दिया। तीनों अभी कुछ ही दुर गये थे, कि अचानक एक सफेद रंग की चार पहिया गाड़ी रूकी और तीनों को लेकर फरार हो गयी। लेनिक दूर बैढी छोटी लड़की ने उन अज्ञायत बदमाशों को अपने बहन को जबरन गाड़ी में बैठातें देख लिया। लेकिन बहन को क्या मालूम की ये कोई अपहरण नही बल्कि अपने ही भाई द्वारा घमने जाने की पूरी प्लानिंग है। तीनों रात के तकरिबन 3 बजे सड़क पर पहुच गये। और एक सवारी गाड़ी आते देख हाथ दिया और गाड़ी के रूकते ही तीनों उसमें सवार होकर चल दिये घुमने के लिए। जब ये टूड़ला स्टेशन पर पहुचे तभी इनके मोबाइल में घर से फोन आया तो चिन्टू ने फोन किया तो उसे पता चला कि ये मामला है। और हमारे अपहरण की सूचना थाने में दे दी गयी है। तब इन्हें लगा अब हमें घर चलना चाहिए। और ये घर लौटने लगे। भले ही बाप को इनके इस नादानी पर नारजगी है, लेकिन उसे इस बात की खुशी भी है, कि इनके औलाद सही सलामत इनके सामने खड़े है।

एक साथ तीन अपहरण सुन पुलिस की रातों की नींद उड़ चुकी थी। लिहाजा पुलिस भी अपनी तरफ से खोज बीन कर रही थी। लेनिक जब सारा वाक्या उनके सामन आया तो वे भी शक्तें में आ गयी थी। तीनों की बरामदगी होने के बाद अब पुलिस भी राहत की संाश ले रही है।
जब फिरौती कोई बात नही आयी तब पुलिस को शक था, कि ये कोई अपहरण नही बल्कि कुछ और ही मामला है। कहानी किसी फिल्म से कम नही। लकिन कुदर की रहमों करम इन पर थी, जिसके कारण सही सलामत ये अपने घर आ गये।—–रिपोर्टर सुशील कुमार, संवादाता

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