हिमपात मौत बनकर आया एक लेफ्टिनेंट समेत 17 जवान शहीद


श्रीनगर: गुलमर्ग और आसपास के इलाकों में दो दिन से हो रहा हिमपात सोमवार को मौत बनकर आया। खिलनमर्ग में सुबह आए बर्फीले तूफान में हाई आल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल के कैंप में भाग लेने आए सेना के एक लेफ्टिनेंट समेत 17 जवान शहीद तथा 17 अन्य जख्मी हो गए। इस बीच बचाव दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 36 जवानों को बचा लिया है। सनद रहे कि खिलनमर्ग में लगे इस कैंप में हिस्सा लेने के लिए सैन्य अधिकारियों और जवानों सहित कुल 511 आए थे।
सोमवार सुबह करीब साढे़ आठ बजे 150 जवानों और अधिकारियों का दल स्कीइंग के लिए निकला। सवा दस बजे पहले 80 जवानों ने अपना सत्र समाप्त किया और वह गुज्जर हट के एक हिस्से में चाय-नाश्ता कर रहा था, जबकि 70 जवानों का दूसरा दल ट्रेनिंग के लिए तैयार होने लगा। ठीक सवा ग्यारह बजे अचानक बर्र्फीला तूफान आया जो अपने साथ दूसरे दलके 70 जवानों को ले गया, जबकि 80 अन्य जवान और दूसरे लोग बच गए। वह सुरक्षित जगह पर शरण लेने में कामयाब रहे। तूफान में कैंप का एक हिस्सा भी तबाह हो गया।
करीब एक घंटे बाद बचाव कार्य शुरू किया जा सका। इसमें अत्याधुनिक सेंसरों, खोजी कुत्तों के अलावा हेलीकाप्टर की मदद भी ली गई। उम्मीद की जा रही है कि सभी लोगों को बचा लिया गया है। फिर भी एहतियात के तौर पर भारी हिमपात के बीच देर शाम अंधेरा होने तक राहत अभियान जारी रहा।
खिलनमर्ग विश्व प्रसिद्व गुलमर्ग से करीब बीस किलोमीटर दूर पीरंपचाल पर्वतश्रृंखला पर स्थितहै। बर्फीले तूफान में तबाह हुए अस्थायी कैंप को गत रविवार को ही गुच्चर हट में स्थापित किया गया था। इसमें 301 प्रशिक्षु, 100 प्रशिक्षक, 60 अन्य कर्मचारी और 50 नागरिक मौजूद थे। प्रशिक्षुओं में 39 अधिकारी, 12 जेसीओ और अन्य जवान थे। यह लोग 16 दिसंबर से वहां नौ सप्ताह तक चलने वाले हाई आल्टीट्यूड वारफेयर कोर्स में हिस्सा ले रहे थे।
इससे पूर्व बर्फीले तूफान की सूचना मिलते ही सेना के उच्चाधिकारी, राज्य के पर्यटन राज्यमंत्री नासिर असलम वानी, डीआईजी उत्तरी कश्मीर अब्दुल क्यूम मन्हास भी अपने अधीनस्थ अधिकारियों के साथ जायजा लेने पहुंचे।
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस बरार ने बताया कि एक लेफ्टिनेंट समेत 17 जवान शहीद हुए हैं, जबकि 17 अन्य जख्मी हैं। लापता हुए 36 अन्य जवानों को भी बचा लिया गया है। उन्होंने बताया कि कैंप में मौजूद अन्य लोग भी सुरक्षित हैं और उन्हें नीचे लाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि तूफान में शहीद लेफ्टिनेंट की पहचान प्रतीक के रूप में हुई है। वहीं घायल जवानों को पहले गुलमर्ग अस्पताल पहुंचाया गया और बाद में उन्हें हेलीकाटर की मदद से बेस अस्पताल लाया गया।
इस बीच स्नो एवलांच स्टडी इस्टेवलिशमेंट (एसएएसई) ने गुलमर्ग, जवाहर सुरंग और एलओसी पर स्थित उच्च पर्वतीय इलाकों में अगले चौबीस घंटों के दौरान बर्फीला तूफान आने की आशंका जताते हुए अलर्ट जारी कर दिया है

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