अन्य देवी-देवताओं की जयंती मनाते हैं तो शिव की रात्रि क्यों?


शिव रात्रि पर्व पर बेर चढ़ाते हैं, बेल पत्र चढ़ाते हैं, लेकिन यह मात्र एक त्यौहार नहीं है। शिवरात्रि के महत्व को समझने की जरूरत है। अन्य देवी-देवताओं की जयंती मनाते हैं तो शिव की रात्रि क्यों। ज्ञान के प्रकाश के अभाव में बढ़ रहे झगड़ों को खत्म करना होगा।
शिव वरदानी सप्ताह में हो रहे कार्यक्रमों में भावपूर्ण संदेश देते हुए सरिता बहन ने कहा कि बेर चढ़ा रहे हैं, लेकिन बेर के साथ ‘बैर’ को भी चढ़ाने का पर्व है शिवरात्रि। कड़वाहट रूपी जहर को शिवरात्रि के पर्व पर शिव को अर्पित करें। ये है पर्व की महत्ता। शिवरात्रि मात्र अन्न के त्याग का व्रत नहीं है, बल्कि व्रत है काम-क्रोध, लोभ व माया को त्यागने का।

‘सदगुण-अवगुण के कारण कोई हीरा है तो कोई पत्थर..’ इन शब्दों के साथ में सरिता बहन ने खुद के स्वरूप को पहचानने एवं असली लक्ष्य को तय करने का संदेश देते हुए कहा कि सहज राजयोग के द्वारा सर्वशक्तिमान परमात्मा शिव से आत्मबल एवं निर्भयता वरदान प्राप्त करने के अभ्यास व अनभूति हेतु शिव वरदानी सप्ताह का आयोजन किया गया है।

रविवार को कैला देवी मंदिर के निकट सेवाकेंद्र पर डाक्टर्स की गोष्ठी संपन्न हुई। मेडीकल विंग द्वारा चलाए जा रहे व्यसन मुक्ति अभियान के संबंध में भी जानकारी दी। हार्ट पेशेंट को राजयोग अभ्यास से रोग की मुक्ति की माउंट आबू मुख्यालय पर दी जाने वाली पांच दिवसीय ट्रेनिंग के बाबत बताया—रिपोर्टर – मयंक पोरवाल विशेष संवादाता

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