मदर डेयरी और केंद्रीय भंडार के माध्यम से 14 रुपये किलो की दर से आटा


महंगाई को कंट्रोल करने में नाकाम दिल्ली सरकार ने पब्लिक को राहत देने के लिए सस्ते रेट पर आटा बेचने का फैसला किया है। यह आटा केंद्रीय भंडार और मदर डेयरी के बूथों के जरिए बेचा जाएगा। आटा बेचने के लिए केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार को सस्ती दर पर गेहूं देना भी मंजूर कर लिया है।

दिल्ली के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री हारून यूसुफ ने मंगलवार को इस बारे में बताया। पिछले कुछ दिनों में खुले बाजार में आटे की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। कई इलाकों में इसका रेट 14 रुपये से बढ़कर 17 और 18 रुपये किलो तक हो गया है। लेकिन दिल्ली सरकार अब मदर डेयरी और केंद्रीय भंडार के माध्यम से 14 रुपये किलो की दर से आटा बेचेगी। यह आटा 5 किलो और 10 किलो की पैकिंग में होगा। दिल्ली सरकार का कहना है कि आटे की बढ़ती कीमतों को रोकने के लिए सरकार ने यह वैकल्पिक रास्ता अपनाने का फैसला किया है। यूसुफ का कहना है कि केंद्र सरकार ने सस्ती दर पर आटा बेचने के लिए दिल्ली सरकार को 80 हजार टन गेहूं देने का वादा किया है। यह गेहूं मार्च 2010 तक के कोटे के रूप में दिल्ली को दिया जाएगा।

दिल्ली सरकार का कहना है कि यह गेहूं 1,080 रुपये क्विंटल की दर पर मिलेगा। इस गेहूं को सरकार दिल्ली की फ्लोर मिलों को देगी। ये मिलें इस गेहूं को पीसकर आटे की पैकिंग करके देंगी। इसके बाद दिल्ली सरकार 5 किलो की थैली 70 रुपये और 10 किलो की थैली 139 रुपये की दर से बेचेगी। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली को यह गेहूं 1,080 रुपये क्विंटल की दर से मिलेगा लेकिन गेहूं को लुधियाना से दिल्ली लाने का खर्च दिल्ली सरकार को ही देना होगा। अधिकारियों का कहना है कि गेहूं आने और फिर आटा तैयार होकर मदर डेरी व केंद्रीय भंडार तक पहुंचने में एक हफ्ते से 10 दिन का वक्त लग सकता है। दिल्ली सरकार का मानना है कि उसके इस कदम से खुले बाजार में आटे की कीमतों में कमी आएगी। इससे पहले दिल्ली सरकार ने सस्ती दर पर चीनी बेचने का भी ऐलान किया था लेकिन इस ऐलान के बावजूद अब तक चीनी बेचने की घोषणा पर अमल नहीं हो सका।

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